भारत जिसको सोने की चिड़िया कहते हैं। ऐतिहासिक स्थल और रीति रिवाजों का देश माना जाता हैं। लेकिन समय के साथ साथ सब बदल जाता हैं। इस बात को तो कभी नही जुकलाया जा सकता है कि भारत जैसे देश को अनपढ़ अंगूठा छाप नेता चला रहे हैं और पढें लिखे लोग मजदूरी या कृषि कर के अपना जीवन यापन कर रहे हैं।

भारत देश कला संस्कृति और ऐतिहासिक स्थलों के लिए जाना जाता हैं।लेकिन आज की युवा पीढ़ी इतनी बदल गई हैं कि (लड़की/महिला) की इज़्ज़त कैसे करनी हैं वो भी नही आता है। आज लडकिया जब घर से बाहर निकलती है तो दस बार सोचना पड़ता हैं। क्योंकि अपने देश के युवा लोगो की सोच बहुत ही ज्यादा गंदी हो गई है। इनको पता नही है। उन्होंने भी एक औरत है गर्भ से ही जन्म लिया है। औरत कोई खिलौना नही होती है। औरत तो परमात्मा के बाद वो पूजनीय व्यक्ति हैं।(जो मौत के मुँह में जाकर जिंदगी को जन्म देती हैं।)
"अजीब सी दुनिया है साहब नज़र यहाँ आदमी की खराब है। ओर घूंघट औरतों से करवाते हैं।"
एक माँ,बेटी,बहन, पत्नी की आवाज उन लोगो के लिए जो मूझे खिलौना समझते हैं।
मैं स्त्री हु में नारी हु में कलयुग में फुलवारी हु में दर्शन हु में दर्पण हु में नाद में ही गर्जन हु में बेटी हु में माता हु में बलिदानो की गाता हु में द्रोपती हु में सीता हु पुरुषों की इस दुनिया ने मूझे केसी नियति दिखलाई कभी जुए में हार गए तो कभी अग्नि परीक्षा दिलवाई कलयुग हो या सतयुग हो इल्जाम मुजी पर आता हैं क्यों घनी अंदेरो में चलने से मन मेरा घबराता हैं। में मरती हु में डरती हु जब सफर अकेले करती हूं दर का साम्राज्य बढ़ता हैं कोई साया पीछा करता हैं।मेरी मुठी बन जाटी दिल की धलड़कन बढ़ जाती हैं।दिल मे मेरे घबराहट हैं जाने ये किसका साया है। जाने ये किसकी आहट हैं। अंधेरे में उन हाथो ने मुझको बाहों में खींच लिया। एक नए मुँह वपर हाथ रखा और एक ने आँचल खीच लिया।नारी के सम्मान को मिलकर तार तार सा कर डाला मर्यादा के आंचल को फिर जार जार सा कर डाला। मार है मझे पिटा है बालो से मुझे घसीटा हैं। सारि सीमाओ को तोड़ दिया उन गनी अंधेरी सड़को पर मुझे अकेला छोड़ दिया।सन्नाटे में चीख रही थी खून से लतपत वो काया सब ने तस्वीरे खिंची कोई मदद को आगे न आया कोई मदद करो ये चीख चीख कर चीख भी मुझसे रुठ गई।परिवार की बदनामी होगी सब यही मुझे समझते हैं।ये नई उम्र के लड़के हैं थोड़े तो बहक जाते हैं। अरे भूल जाओ जो हुआ उससे ये लड़के बच ही जायेंगे तुम लड़की हो दुनिया वाले तुम्ही पर प्रश्न उठाएंगे। क्यों कोई नही था साथ मे क्यों निकले अकेली रात में क्या मेकअप था क्या गहने थे क्या छोटे कपड़े पहने थे। इन प्रश्नो के भूल भुलैया में कोई सचाई खो जाती हैं। सब भूल जाओ कहने वाले क्या तुम्हे शर्म नही आती हैं सब भूल जाओ कहने वालों याद रखी ये आखरी गलत्ती आपकी भी हो सकती हैं कल सड़क पर बहन बेटी आप की भी हो सकती हैं अहसास से बढ़ कर कोई दर्द नही हो सकता हैं जो नारी का अपमान करें वो मर्द नही हो सकता हैं तो आओ अपनी मर्यादा का ध्यान रखो नारी का सम्मान करो

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